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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

गजल @ जगदानन्द झा 'मनु'

भाइ आब हमहूँ   लिखब अपन फूटल कपारपर
जेना ई  भात-दालि तीमन ओकर उपर अचारपर

सोन सनक घर-आँगन  स्वर्ग सन हमर परिवार
छोड़ि एलहुँ देश अपन  दू-चारि टकाक बेपारपर

कनिको आटा नहि एगो जाँता नहि करछु कराही नहि
नून-मिरचाइ आनि लेलहुँ सभटा पैंच-उधारपर

चिन्हलक नै केओ नै जानलक तूअर बनि रहलहुँ
गेलहुँ ई अपन माटि-पानि छोड़ि दोसरक द्वारपर

हम कमेलौं घर ओ भरलक हमर खोपड़ी खालिए
आब बैसल मनुकनैए   बरखामे चुबैत चारपर

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२१)

@ जगदानन्द झा ‘मनु’

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