नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

शनिवार, 26 नवंबर 2011

हमरा मिथिला राज चाही


भीख नहि अधिकार चाहीहमरा मिथिला राज चाही 
जे हमर अछि खूनमे  खूनक अधिकार चाही 

जनक वाचस्पतिकेँ पुत्र हमहमर चुप्पीकेँ नै किछु आओर बुझू
शांतचित्त हम समुद्र सनहमर क्रोधकेँ सोनित चाही 

सिंह सन हम बलवान रहितोमेघ सन हम शांत छी 
 जुनि बिसरी ऊधियाइत मेघकेँमुठ्ठीमे संसार चाही

जाहि कोखिसँ सीता छथि जनमलओहि कोखिक संतान छी 
बाँहिमे प्रज्वलित अछि अग्णिबस एकटा संकेत चाही 

भूखसँ व्याकुल छी,   मुदा उठाएब नहि फेकल टुकड़ी 
कर्ण बनि जे नहि भेटल ममता केर अधिकार चाही

माए मैथिली रहती किएक,  निसहाय एना एतेक दिन 
होम करे जे तन मन अप्पन 'मनु' लव कुश सन संतान चाही
जगदानन्द झा 'मनु'

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें