नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

रविवार, 28 जुलाई 2013

गीत




कहु  तँ अहाँ कोना रहब
की की करब यौ पाहून
बिनु जतरे हम नैहर एलहुँ
कोना अहाँ रहब यौ पाहून।।

चूल्हा पजारब कोना अहाँ कहु
कोना राति बिताएब यौ पाहून
बारीक पटूआ तिते बुझलहुँ
छूछे कोना खाएब यौ पाहून।।

लिख-लिख हमहूँ निन्न नहि परलहुँ
अहाँकेँ  सुमरै छी यौ पाहून
की अहुँ एखन जागल होएब
नै सपनामे आबि कहै छी यौ पाहून।।

मंगलवार, 23 जुलाई 2013

बीमारी




आइ साँझू पहर सा०केँ हुनक भाए संगे गामक लेल बिदा कएला बाद हम सिगरेट खरीदक इक्षासँ अप्पन घर प्रथम तलसँ निच्चाँ उतरलहुँ किएक तँ राति भरि लेल जे सिगरेट बचा कए रखने छलहुँ आजुक राति पर्याप्त नहि होएत।
“शराब ! अओर.... नहि, सिगरेटसँ काज चलबअ परत।”
हमर शरीर एहिठाम परञ्च मोनक चिड़ै सा०केँ पाछू पाछू। हमर मोन कनिको नहि लागि रहल अछि। राति भरि आँखिमे नीन्न नहि। बर्खाक पट-पटकेँ स्वर कानमे बम जकाँ फाति रहल अछि। दूर सड़कपर चलैत गाड़ीक अबाज ओनाहिते सुनाइ दए रहल अछि। केखनो केखनो मच्छरक संगीत संगे बाहर नालीसँ फतिंगाक गाबैक अबाज, जे शाइद झींगुर हुए अथवा कोनो अओर। कीट फतिंगाक अबाज चिन्हैमे हम बड्ड नीक नहि। भोरे आठ बजे उठै बला आइ पाँचे बजे उठि कए धियापुताकेँ इस्कूल जेए लेल जगाबैए लगलहुँ। धियापुता नित्य क्रियामे लागि गेल आ हम सोचए लगलहुँ, “एसगर एना कतेक दिन, ई तँ बीमारी छी, सा०केँ बिन नहि रहैक बीमारी।”    

रविवार, 21 जुलाई 2013

मिथिला राज्य निर्माण यात्रा - २






२२ जुलाई सँ २६ जुलाई - सुलतानगंज (भागलपुर), तारापुर (मुंगेर), रामपुर (मुंगेर), कुमरसाइर (मुंगेर), धौरी (मुंगेर), जिलेबिया (मुंगेर), सुइया (बाँका), दण्डी आश्रम (बाँका), अभरक्खा (बाँका), कटोरिया (बाँका), इनारावरण (बाँका), गोरियारी (बाँका), दुम्मा (मोहनपुर), कलकतिया (मोहनपुर), भूत बंगला (देवघर), बाबाधाम (देवघर), वासुकीनाथधाम (जरमुंडी)।

गुरुवार, 18 जुलाई 2013

नजरि मिलाबए जोगरक



भोरे भोर मोबाइल फोनक घंटी, “ट्रिन ट्रिन.....!
दीनानाथजी फोनक स्क्रीनपर देखलनि, हुनकर छोटकी भाबौक फोन, आमने सामने एक दोसरसँ गप्प नहि होइ छनि मुदा फोनपर जरूरी गप्प आ समादसँ परहेज नहि।
हेलो।
भाइजी, नास्ता करैक लेल आबि जाऊ।
नास्ता तँ हम कए लेलहुँ।
की सब केलहुँ।
रातिक तरकारी बचल छलै, दूटा रोटी आ चाह बना नेने रही।

मंगलवार, 16 जुलाई 2013

मेघ राजा जल्दी आ

बाल कविता-86
मेघ राजा जल्दी आ

मेघक राजा जल्दी आ
बाल्टी भरि भरि पानि ला
सुखलै आम, मौलाएल लताम
मरल जन्तुकेँ आबि जिया
मेघक राजा जल्दी आ

गुरुवार, 11 जुलाई 2013

अन्तिम प्रेम

                                                                                     
कनाट प्लेस। कॉफी हॉउसक आँगन कएकरो इंतजारमे टाइम पास करैत कॉफीक चुस्कीक आनन्द लैत। हमर सामनेक खाली कुर्सीपर करीब १५ बर्खक कन्याँ आबि बैसैत, “अहाँकेँ खराप नहि लगे तँ हम बैस रही।”
“किएक नहि।”
ओ बातूनी कन्याँ एकपर एक सबाल दागैत, “लगैए अहाँ कोनो MLM बिजनेसमे छी।”
“हाँ।”
“ओ माइ गॉड, MLM हमर फेबरेट विषय अछि। हम बारहवीँमे पढ़ै छी, हमरो इक्षा अछि जे ग्रेजुएशनकेँ संगे MLM बिजनेस कए कऽ टाइम फ्रीडम आ मनी फ्रीडम पाबी।” पता नहि अओर की की बतियाइत ओ बातूनी अंतमे हमरा थेंक्स कहि ओहिठामसँ चलि गेल।

ओकर गेलाक बाद हमर भीतरक शैतान जागल, “हमर अंतिम अवस्थामे, हमर अंतिम प्रेमक अंतिम नाइका कोनो एहने १५-१६ बर्खक बातूनी हेबाक चाही।” 

शनिवार, 6 जुलाई 2013

गीत

तोहर रुप पूर्णिमा के चान गोरिया
लेलक लेलक हन सभके प्राण गोरिया -2
तोहर आँखिक तीर सभके घायल केलक
ताहु सॅ जे बचल तोहर पायल केलक
कत्ल केलक हन कातिल मुस्कान गोरिया

गुरुवार, 4 जुलाई 2013

हमर मुइला बाद



हमर मुइला बाद..... जँ हम जंगल वा कोनो प्राकृतिक आपदामे मरी तँ, जंगलक जानवर अथवा चील कौआकेँ छूट जे हमर देहकेँ नोचि नोचि कए खा जए... मुदा प्राथना जे हमर आँखिकेँ छोरि दए। दुख हमर आँखिक नहि, हमर आँखिमे बसल हमर प्रीतमक छबी खराप होबैकेँ अछि। जँ हम सड़क दुर्घटनामे मरी तँ, एहि देहके आगिकेँ समर्पित करैसँ पहिने हमर आँखिकेँ कोनो खगल नेनाकेँ दान कए देल जाए, कारण हम नहि तँ हमर आँखि;.... नम्हर उम्र धरि प्रीतमकेँ ताकैत रहे। आ जँ हम वयोवृद्ध भए कऽ मरी, प्रीतमसँ पहिने तँ प्रीतमक घरक पाछू हमर सारा बने, आ प्रीतमक बाद तँ हमर सारा हमर प्रीतमक सारा संगे बने।

बुधवार, 3 जुलाई 2013

गीत


लड़का - चलय तीरथ करब चारु धाम गे बहिनी , चलय तीरथ करब चारु धाम
लड़की - मिथिला सन कोनो नहिं धाम यौ भइया , मिथिला सन कोनो नहिं धाम
लड़का - चलय तीरथ करब चारु धाम गे बहिनी , चलय तीरथ करब चारु धाम
लड़की - मिथिला सन कोनो नहिं धाम यौ भइया , मिथिला सन कोनो नहिं धाम
लड़का - पहिने जायब देखब अवधपुर -2 , जनम लेलनि  जेतह श्रीराम गे बहिना
चलय तीरथ करब चारु धाम .........................................
लड़की - अवध से  सुन्दर मिथिला नगरी -2, बहिन सीता के गाम यौ भइया
मिथिला सन कोनो नहिं धाम ..................................................
लड़का - तखन जायब मथुरा वृन्दावन - 2 , रास रचेलेनि जेतह घनष्याम गे बहिना
चलय तीरथ करब चारु धाम ......................................................
लड़की - वृन्दावन सौ सुन्दर जनकक फुलवारी -2 , सुगा पढ़य छई वेद पुरान यौ भइया
मिथिला सन कोनो नहिं धाम........................................................
लड़का - षिवके नगरी देखब काषी -2 , महादेवक प्रिय स्थान गे बहिना
चलय तीरथ करब चारु धाम ......................................................
लड़की - जाहिठाम उगना बनला महादेव - 2 , विद्यापतिके गाम यौ भइया
मिथिला सन कोनो नहिं धाम........................................................
लड़का - साँचे कराओल तु ज्ञान गे बहिनी , मिथिला सन कोनो नहिं धाम
लड़की - मिथिला सन कोनो नहिं धाम यौ भइया , मिथिला सन कोनो नहिं धाम
साथ - मिथिला सन कोनो नहिं धाम यौ भइया (गे बहिनी ) , मिथिला सन कोनो नहिं धाम - 4


लेखक - आशिक ’ राज’