नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

मंगलवार, 10 जनवरी 2012

माँ केर ममता

माँ केर ममता होई अछि जेना सागर ,
कखनो न ख़ाली होई अछि इ गागर ,

फूसीयो जो कखनो हम रुसी जायेत छि ,
आबी -आबी देखू कोना हमरा मनाबथी,

सदिखन हमर ओ त हिम्मत बढआबथी ,
बाट क सदिखन दूर करतीं अँधियारा ,
माँ लेल बच्चा होई अछि बड़ प्यारा ,

सत्य क मार्ग ओ त सदिखन देखाबथी,
राइत में जखन हमरा नींन नै आबे ,
लोरी बैस क सगरो राइत वो सुनाबथी ,

जखन- जखन भय सां हम घबराबी,
हाथ में आँचल हुनके त हम पाबी ,

माँ त होइत अछि सब गुण केर आगर,
माँ केर ममता होई अछि जेना सागर ,

'' रूबी झा ''

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें